तुलसी विवाह का पर्व हमारे हिन्दू संस्कृति में एक बेहद ही पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक शुक्ल की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु के विग्रह रूप शालीग्राम के साथ किया जाता है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है की जो ही इस दिन तुलसी जी का विवाह कराता है उसे कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।
तुलसी विवाह मंत्र हिंदी में । Tulsi Vivah mantra in Hindi
विष्णुपत्नी विवाहार्थे तुलस्यां विधिवत्क्रिये।
तवदीयं संनिधिं तुष्टिं दास्यामि केशवानुग्रहात्॥
तुलसी विवाह मंत्र का विवरण :
हमारे धार्मिक अभिलेखों में यह कहा गया है की माता तुलसी सती और पतिव्रता का प्रतीक हैं। तुलसी जी को माँ लक्ष्मी के समतुल्य भी बताया जाता है और इसी लिए तुलसी विवाह के दिन उनके मंत्र के जाप से आपको माता लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। इस तुलसी विवाह का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है और इसीलिए सभी इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं। तुलसी विवाह के दिन उनके इस मंत्र का जाप से व्यक्ति अपने जीवन में पुण्य अर्जित कर सकता है।
इस मंत्र का जाप आपके जीवन में सुख, समृद्धि और कृतज्ञता का भाव लाता है। इस तुलसी विवाह को बड़ा ही पावन और पुण्य का कार्य माना जाता है और इसे जो भी संपन्न करवाता है उसे और उसके आने वाले पूरे वंश में धन, विद्या, सुंदरता, शक्ति, वीर्य, धर्म, और लक्ष्मी का वास रहता है। साथ ही यह भी कहा जाता है की इस विवाह से नारायण और माता लक्ष्मी की आप पर विशेष कृपा बनी रहती है।








