भगवान शिव की महिमा से इस संसार का हर व्यक्ति भली भांति परिचित है। उन्हें इस सृष्टि का पालक भी कहा जाता है और इस सृष्टि का संहारक भी। अपने रुद्र रूप में वह स्वयं ही इस पूरी सृष्टि का अंत करते हैं। काल चक्र से परे महादेव को महाकाल भी कहा जाता है। उनके इस रुद्र रूप के गायत्री मंत्र का जाप आपको महादेव और गायत्री माता दोनों का ही आशीर्वाद दिलाता है।
रुद्र गायत्री मंत्र हिंदी में । Rudra Gayatri Mantra in Hindi
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।
रुद्र गायत्री मंत्र का विवरण :
इस मंत्र के माध्यम से भक्त स्वयं को महादेव की चरणों में समर्पित कर देता है। इस मंत्र का अर्थ भी बड़ा ही सरल सा है, इसके माध्यम से भक्त कहता है की, “हे सर्वेश्वर, हे महादेव, जिन्होंने अपने हाथों में त्रिशूल धारण किया है, मेरे जीवन के सभी शूल अर्थात कष्टों का अपने आशीर्वाद से नष्ट करें, अब मैं आपके चरणों में शरण लेता हूँ, कृपा करके मेरी रक्षा करें।”
इस शिव गायत्री मंत्र का पाठ करने वाले हर एक व्यक्ति का कल्याण निश्चित ही होता है। इस मंत्र का जाप करने के लिए सबसे उपयुक्त दिन सोमवार को है। हालाँकि इस मंत्र का आरंभ आपको शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार से उपवास रखकर करना चाहिए। साथ ही इस मंत्र के पाठ के बाद विधिपूर्वक शिव जी की पूजा भी करें। खासकर श्रावण मास में जो भी इस मंत्र का जाप करता है उसे महादेव की कृपा मिलती है।








