अपने शरीर को उचित पोषण देकर स्वस्थ और ऊर्जावान बनाने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए

सूर्य मंत्र | Surya mantra lyrics in Hindi

प्रत्येक मनुष्य का शरीर अलग आकार प्रकार का बना होता है। हरेक के शरीर के विकास के लिए उचित पोषण चाहिए। अपने शरीर को स्वस्थ रखना सबकी अपनी ज़िम्मेवारी है। आज के इस भाग दौर भरी आधुनिक जीवन में मनुष्य का शरीर किसी न किसी व्याधि से ग्रसित हो ही जाता है चाहे वो लम्बे समय के लिए हो या थोड़े समय के लिए। इसलिए उचित पोषण के साथ ही कुछ विशेष चीज की भी जरूरत पड़ती है। वह विशेष चीज है मंत्र जो यहाँ नीचे है।

सूर्य मंत्र

ॐ पूष्णे नमः
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
ॐ मरीचये नमः

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सूर्य मंत्र का अर्थ:

पोषक को प्रणाम, स्वर्णिम् विश्वात्मा को प्रणाम, सूर्य रश्मियों को प्रणाम।

हरेक मनुष्य को अध्यात्म से जरूर जुड़ना चाहिए। इस मंत्र का जाप करने से पहले शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वच्छ हो जाना चाहिए। इस मंत्र का जाप सूर्योदय या सूर्यास्त के समय ही करें। इस मंत्र का जाप करने के दौरान अपना मुख सूर्य की तरफ रखे। अपने शरीर को सीधा रखते हुए प्रणाम करने की मुद्रा में रहे। इस मंत्र का जाप अपने इच्छा अनुसार पांच, सात या ग्यारह बार कर सकते है।

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सूर्य देव के सामने इस मंत्र के जाप से आपके शरीर में नई ऊर्जा का विकास होगा। आपके शरीर का पोषण सही तरीके से होगा। शरीर की व्याधियाँ दूर होगी। आपके शरीर के विकास में आ रही बाधाएँ दूर होगी। आपका मन प्रसन्न रहेगा।

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