हिन्दू धर्म में इस बात की मान्यता है की इस पूरे ब्रह्मांड, जीव-जंतु, मनुष्य, सभी कुछ का निर्माण कुल आठ तत्वों से हुआ है, जिनमें पांच तत्व को हम महसूस कर सकते हैं और इनका बड़ा ही महत्व माना जाता है। हमारे वेदों और उपनिषदों में इस पूरी प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन दिया गया है, जहाँ हमारे इस शरीर के निर्माण की प्रक्रिया भी बताई गयी है।
पंच तत्त्व मंत्र हिंदी में । Panch Tattva Mantra in Hindi
श्रीकृष्णचैतन्य प्रभु नित्यानंद ।
श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्तवृंद ॥
पंच तत्त्व मंत्र का विवरण :
इसी तरह भगवान विष्णु के अवतार के रूप में श्री कृष्ण के पंच भक्तों को भी इस पंच तत्व मंत्र के माध्यम से स्मरण किया जाता है। कहते हैं की कृष्ण भगवान के इन भक्तों द्वारा कृष्ण स्तुति में बनाये गए इस मंत्र का बड़ा ही महत्व है और जो भी इसका जाप पूरे मन और पूरी श्रद्धा के साथ करता है उसे श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और उसे इस पंच तत्व शरीर से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कहते हैं की हमें इस मंत्र के साथ पंच तत्वों की साधना भी करनी चाहिए। इसे करने से आपको कई लाभ प्राप्त होते हैं, यह कोई पूजा नहीं बल्कि प्रकृति का आदर और सम्मान करना है। उदाहरण स्वरूप प्रति दिन अगर हम सुबह खाली पैर भ्रमण करें तो इससे हमारे और प्रीति तत्व के बीच एक संबंध स्थापित होता है जो हमारे लिए बेहद ही लाभकारी सिद्ध होता है।
उसी तरह जब भी जल का ग्रहण करें अपने मन में स्वयं को खुशनसीब मानें जिसे इस अमृत सामान जल को ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। जो भी इस प्रकृति और पंच तत्व का सम्मान करते हैं उनके जीवन में खुशहाली आती है और जीवन सुखमय बना रहता है।








