ग्रह दोष से छुटकारा पाने के लिए इस तरीके से करें इस मंत्र का जाप

श्री शनि मंत्र | Sri Shani mantra lyrics in Hindi

हमारे सूर्य मंडल में नौ ग्रह है। इन ग्रहों का प्रभाव हमारे ऊपर भी पड़ता है। ये प्रभाव सकारात्मक भी हो सकते है और नकारात्मक भी। प्रत्येक व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवन काल में कभी न कभी ग्रह के दोष से ग्रसित हो ही जाता है। इस तरह के ग्रह दोष में शनि का नकारात्मक प्रभाव सबसे बुरा माना जाता है। इस तरह के ग्रह दोष से निवारण के लिए श्री शनि मंत्र का जाप करना पड़ता है।

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श्री शनि मंत्र

जय जय श्री शनिदेव प्रभु,
सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय,
राखहु जन की लाज॥

श्री शनि मंत्र का अर्थ:

हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु, हमारी प्रार्थना सुनें, हे सूर्य पुत्र हम पर कृपा करें, हे भगवान भक्तजनों की लाज रखें।

भगवान श्री शनिदेव के इस मंत्र का जाप सप्ताह में सिर्फ एक दिन शनिवार को करना होता है। इस मंत्र का जाप सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में करना होता है। इस मंत्र का जाप करने से पहले शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वच्छ हो जाना होता है। इस मंत्र का जाप पीपल के पेड़ के नीचे जड़ के पास बैठ कर करना होता है।

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इस मंत्र का जाप करने के दिन शनिवार को काले वस्र धारण करने होते है। इस मंत्र का जाप करते समय पीपल के पेड़ के पास दिये जलाने होते है और इसके जड़ में गंगा जल डालना होता है। इस मंत्र का जाप लगातार पांच बार करना होता है। इस विधि से इस मंत्र का जाप सात सप्ताह करने से फल की प्राप्ति होती है। इस मंत्र के प्रभाव से सारे ग्रह दोष दूर हो जाते है। मनुष्य ग्रहों के कुचक्र से बाहर निकल जाता है।

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