भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता अर्थात सभी बाधाओं को दूर करने वाले के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है की किसी भी शुभ कार्य से पहले उनके इस मंत्र के जाप से आपका कार्य निश्चित ही सफल होता है। पुराणों में इस बात का जिक्र है की भगवान शिव ने अपने सुपुत्र गणेश जी को वरदान दिया था की संसार में हर शुभ कार्य में सबसे पहले उन्हीं की पूजा होगी, उसी वजह से उन्हें प्रथम पूज्य भी कहा जाता है।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ मंत्र । Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha Mantra in Hindi
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ मंत्र का विवरण :
गणेश भगवान के यह मंत्र में सबसे उत्कृष्ट मंत्र माना जाता है और आप अकसर किसी भी पूजा या विवाह इत्यादि समारोह में सबसे पहले इसे सुनते हैं। इस मंत्र का एक बड़ा ही महत्व होता है और ऐसा कहा जाता है की गणेश भगवान के इस मंत्र के जाप के बाद कोई विवाह, पूजा, इत्यादि समारोह की शुरुआत की जाए तो यह सफल होते हैं।
इस मंत्र का अर्थ बड़ा ही सरल सा है और इसके माध्यम से गणेश भगवान की विशेषताओं को दिखाया गया है। इसमें कहा गया है की हे श्री गणेश, जिनका सिर घुमावदार है, जिनकी एक विशाल काया है, जिनकी आभा यानी चमक कई अरबों सूर्य की चमक से भी तेज है, हम आपसे प्रार्थना करते हैं की हमारे जीवन की सभी बाधाएं दूर करें और हमारे कार्य को सफल बनायें।
इस मंत्र का जाप करने से पूर्व अपने मन में संकल्प स्थापित कर लें। उसके बाद अपने पीठ को सीधा रखते हुए गणेश भगवन की प्रतिमा के सामने बैठ जाएं। अब अपनी आँखें बंद करें और सच्ची श्रद्धा और पूरे मन से इस मंत्र का जाप करें।








