नवरात्र के इस पावन महीने में अपने परिवार को खुशहाल रखने के लिए और पीढ़ी-दर-पीढ़ी जारी रहने वाले स्त्री अभिशाप से बचाने के लिए नियमित रूप से करें यह उपाय।

ऐसा कहा जाता है की पूर्वजों द्वारा दिया गया हर वचन ईश्वरीय वचन होता है। कई बार पूर्वजों ने इस स्त्री अभिशाप के बारे में बताया है और कैसे इसके बुरे परिणाम होते हैं। यदि यह श्राप किसी परिवार पर आ जाता है तो उस घर में शांति का माहौल कभी नहीं रहेगा और पीढ़ियों तक गरीबी बनी रहेगी। उस घर की लड़कियां अविवाहित, निःसंतान भी होती हैं और उन्हें कोई न कोई शारीरिक बीमारी होने का भी खतरा रहता है।

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यदि किसी परिवार में इस तरह की स्थिति बनी हुई है तो इसका साफ़ अर्थ है की उस परिवार पर स्त्री अभिशाप का दोष लगा हुआ है। आज हम आपको इसी के बारे में अवगत कराएंगे और अगर आपके परिवार में भी इस स्त्री श्राप की वजह से परेशानियां बनी हुई है तो इन चार आसान काम के साथ इसे दूर करने का उपाय बताएंगे, जिससे आपका परिवार इस दोष से छुटकारा पा सके।

स्त्री श्राप से मुक्ति के लिए क्या करें :
हमें इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए सबसे पहले ईश्वर पर विश्वास करते हुए उनकी शरण में जाना होगा। उसके लिए आप जब भी भगवान की पूजा करें तो इस एक पंक्ति के मंत्र का जाप जरूर करें, “ॐ श्रीं महालक्ष्मी ॐ”। इस मंत्र का जाप आपको तब करना है जब भी आप घर में दीपक जलाएं और घर के देवता की पूजा करें।

यह मंत्र इस दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दरिद्रता से मुक्ति पाने और धन-संपदा में वृद्धि के लिए हमें मां महालक्ष्मी की कृपा की आवश्यकता होती है। इसलिए जब भी आप घर में भगवान की पूजा करें तो आप इस मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप कर सकते हैं।

इसके बाद अगला कदम है पूर्णिमा के दिन अन्न का दान करना। आपको हर पूर्णिमा के दिन कम से कम सात लोगों के खाने के लिए भोजन का दान करना होगा। खासतौर पर इस दिन अगर आप बुजुर्गों को दान देंगे तो आप पर बहुत कृपा बरसेगी। यह कहा जा सकता है कि यह दान हमारे बुरे कर्मों से छुटकारा पाने और परिवार में अच्छे कर्म जोड़ने का एक अच्छा उपाय है।

तीसरा कार्य आपको अपने घर को अच्छे से रोशन कर के रखने का है। कोशिश करें की आपका घर रौशनी से भरपूर रहे और काले सायों से बचा हुआ रहे। साथ ही आपको प्रतिदिन अपने मृत पूर्वजों के चित्र के सामने दीपक जलाना चाहिए। महीनों में एक दिन उनकी पूजा करने की बजाय आपको प्रतिदिन उनकी पूजा करनी चाहिए। यदि हम उनकी पूजा नहीं करते तो हमारे कुल पर और भी किसी तरह के श्राप का खतरा मंडराता रहता है।

अब आते हैं इसके चौथे उपाय पर जो सबसे महत्वपूर्ण है। यह बेहद ही आसान भी है। आपको अपने परिवार की महिलाओं का हमेशा सम्मान करना चाहिए। परिवार में स्त्री जितनी सुखी होगी, परिवार उतना ही समृद्ध होगा। यदि किसी परिवार में स्त्री खुश नहीं है और दिन-रात रो रही हैं तो उस परिवार पर संकट के बादल हमेसा बने रहेंगे और यह स्त्री श्राप भी अपना घर जमाये रखेगा। स्त्री दोष उत्पन्न न हो और श्राप दूर हो, इसके लिए स्त्रियों के साथ अत्यंत सम्मानपूर्वक व्यवहार करना आवश्यक है।

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तो इसी के साथ हम यह आध्यात्मिक पोस्ट समाप्त करते हैं जिसमें हमने स्त्री श्राप दूर करने के सरल उपायों के बारे में जाना। किसी तरह की गलती करने और फिर उसे सुधारने की कोशिश करने के बजाय, बेहतर है कि हम अपना जीवन अच्छी तरह से जिएं ताकि इस तरह के अभिशाप हमारे परिवार पर न आ पड़ें।

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